देहरादून, निशांत भारती।जीवन की प्रेम कहानी मनुष्य की सोच विचार के अनुसार सुना है कि जो प्यार करते है वो सबसे पहले एक दूसरे को अच्छे से जान नहीं लेते तब तक वो फैसला नहीं करते है। लेकिन हमने तो ऐसा प्यार किया जिससे आज तक मिले ही नहीं और प्यार ऐसा किया खुद से भी ज्यादा अपने से ज्यादा उस पर विश्वास करने लगा था। मै अपने कार्य में इतना व्यस्त रहता था कि उसके अलावा मैं किसी को समय नहीं दे पाता था। लेकिन उसकी एक गलती ने मुझे ऐसा कर दिया अब उस पर विश्वास होता ही नहीं, और आज कहती है कि मेरे पास समय नहीं है आपसे बात करने का। मुझे लगता है कि शायद उसको मेरे से अच्छा मिल गया हो। लेकिन मुझे अब तक समझ नहीं कि इस प्रेम कहानी में, मै दोषी या वो इसका जवाब मै अभी तक सोच रहा हूॅ। मै आज भी उससे मिलने का इंतजार कर रहा हूॅ।
ये कैसा प्यार