फ़िल्म 'सौम्या गणेश' का लॉन्च किया गया


देहरादून: पदमा सिद्धि फ़िल्म्स के बैनर तले अभिनेता-निर्देशक-लेखक अविनाश ध्यानी की आनेवाली फ़िल्म 'सौम्या गणेश' का लॉन्च किया गया. भव्य अंदाज़ में हुए इस लॉन्च कार्यक्रम का आयोजन देहरादून के तवोपन में कलिंगा ग्राउंड में हुआ. लॉन्च के दौरान फ़िल्म में मुख्य किरदारों निभा रहे अविनाश ध्यानी और संस्कृति भट्ट इस लॉन्च कार्यक्रम में उपस्थति रहे . इस दोनों के अलावा सह-निर्माता सचिन गर्ग, अभिनेता सहर्ष कुमार शुक्ला, अलका अमीन, अरुण बख़्शी, नीरज सूद और शगुफ़्ता अलीने भी अपनी मौजूदगी दर्ज़ कराई. यह फ़िल्म एक ऐसे शख़्स की कहानी है, जो टाइप 2 डायबिटीज़ का शिकार है. इसे चलते उसकी पुरुष प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है और उसके टेस्टोस्टेरोन लेवल में भारी गिरावट आ जाती है. मगर सौम्या और गणेश का प्यार पेड़ पर ऊगनेवाले फ़ूलों की तरह पवित्र और ख़ूबसूरत है. उनके लिए एक दूसरे के साथ होने से बढ़कर कुछ भी नहीं है. वो हर पल एक-दूजे से मिलने की ख़्वाहिश रखते हैं, मगर तमाम मौके मिलने के बावजूद हालातों के मद्देनज़र वो चाहकर भी एक-दूसरे अपने प्यार का इज़हार नहीं कर पाते हैं. उनकी असली समस्या यह है कि दोनों को नहीं पता कि स्वाभाविक ढंग से हुई दोस्ती के पीछे छिपे प्यार के ताज़ातरीन ज़ज्बातों को किस तरह से बयां किया जाए. कुछ इस तरह से शुरू होती है सौम्या और गणेश की लव स्टोरी. उन्हें पता है प्यार आख़िरकार एक दिन दोनों को ढूंढ ही लेगा. इस बीच, स्कूल में पढ़ने के दौरान एक दूसरे से दोनों की मिलने और ज़्यादा से ज़्यादा वक्त एक-दूसरे के साथ बिताने की बेचैनी बढ़ती ही जाती है. लेकिन जब प्यार के इज़हार की बात आती है, तो दोनों के बीच ऐसा कुछ भी नहीं होता है क्योंकि दोनों को एक-दूसरे के प्रति प्यार के गहरे एहसास ही नहीं होता है. मगर फिर दोनों को आहिस्ता आहिस्ता इस बात का आभास होता है. दोनों को देर से ही सही, एक-दूजे के लिए अपने प्यार की एहसास होता जिसे बड़े ही रोमांटिक अंदाज़ में फ़िल्माया गया है और इन ख़ूबसूरत लम्हों के ज़रिए बताने की कोशिश की गयी है कि कैसे दोनों एक अर्से से एक-दूसरे के लिए अपने जज़्बातों को छुपाने और बताने से झिझक रहे थे. प्यार के इज़हार का वाकया तब सामने आता है, जब सौम्या को लगता है कि गणेश किसी और लड़की के बारे में बात कर रहा है, जबकि असल में गणेश सौम्या को शादी के लिए प्रपोज़ कर रहा होता है. इस कहानी में कोई विलेन नहीं है. उनकी शादी को लेकर किसी को भी ऐतराज़ नहीं होता है. उनकी शादीशुदा ज़िंदगी भी ख़ुशहाल होती है.


इस फ़िल्म को रिषीकेश, हरिद्वार और देहरादून, नई दिल्ली और मुम्बई के ख़ूबसूरत लोकेशन्स पर फ़िल्माया जाएगा.


इस मौके पर अविनाश ध्यानी ने कहा, "उत्तराखंड हमेशा से ही मेरी पसंदीदा जगह रही है. यहां मुझे घर जैसा महसूस होता है. यह मेरी दूसरी फ़िल्म जिसे यहां फ़िल्माया गया है और सौम्या और गणेश की यह कहानी की मांग थी कि इस फ़िल्म को ऐसे ही ख़ूबसूरत लोकेशन पर फ़िल्माया जाए.  यह दोनों लोगों के प्यार की जुनूनी कहानी है. फ़िल्म के ज़रिए यह बताने की कोशिश की गयी है कि चाहे जैसे भी हालात हों, मगर हमें ज़िंदगी का भरपूर लुत्फ़ उठाना चाहिए. इस फ़िल्म के ज़रिए यह बताने का भी प्रयास किया गया है कि प्यार दो लोगों के बीच होनेवाले शारीरिक आकर्षण से परे होता है.